सिद्धार्थनगर ( रामदेव द्विवेदी, ऊँ टाइम्स) क्या आप को पता है कि जब भी दवाओं के दुकानों की जांच के लिए कोई बाहरी टीम आती है तो धड़ा-धड़ 90 प्रतिशत दवा की दूकाने क्यों बन्द हो जाती हैं? वह इस लिए क्योंकि ना तो दवा का दूकान मानक शुदा होता है, और ना ही उसमें बिकने वाली कुछ दवायें ही मानक शुदा होती हैं! जब कोई बाहरी जांच टीम आती है तो विभागीय लोग अपने दलालों के माध्यम से दूकानदारों को जांच टीम आने की सूचना जांच टीम आने के पहले ही दुकानदारों तक पहुंचा देते हैं, क्यों कि इनका सेटिंग गेंटिग रहता है,और इन्हें बंधा बंधाया लाभ मिलता है! जब मुहकमा के जिम्मेदार अपने कर्त्तव्य से विमुख हो जाते हैं तो कुछ भी असंम्भव नहीं है! लेकिन कुछ भी हो जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ बेहद चिंता का विषय है! जब तक उच्चाधिकारी और राजनेता लोग इस पर ध्यान नहीं देंगे तब तक अधोंमानक दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगने का आसार नहीं दिख रहा है! इस कार्य में शोहरतगढ, कन्दवा बाजार उर्फ उदयराजगंज, चिल्हिया, बढनी आदि चर्चित है !
